Swadhyay Sandoh Shivir- 10th to 12 th May 2013, Shantikunj Haridwar
3 Days Spreading Affinity Gathering
Share Feedback / Suggestions/ Comment     Images
         
Anubhooti 1 Anubhooti 2
हिमालय की छाया में और गंगा की गोद में , गंगा तट पर परम पूजनीय गुरुदेव द्वारा निर्देशित अमृतवर्षा ध्यान धारणा की दिव्य अनुभूति स्वाध्याय संदोह शिविर में १२ मई को गंगा तट पर परम पूजनीय गुरुदेव द्वारा निर्देशित अमृत वर्षा ध्यान सभी साधकों के लिए पूजनीय गुरुदेव का दिया अद्भुत वरदान सिद्ध हुआ , गुरुसत्ता जो साधकों को निर्देश दे रहे थे वह प्रकृति भी समर्पित शिष्य की भाँती हमें दर्शन करा रही थी ...जैसे मीरा की भाँती प्रकृति ने समर्पण किया हो ... ध्यान के आरम्भ में परम पूजनीय गुरुदेव द्वारा निर्देश दिया गया " उफान तूफ़ान ,उफान तूफ़ान दूध झाग सा हिमालय के सरवोच्च शिखर पर , उफान अमृतधारा का .. शुभ्र मेघ माला का , अमृतधारा का उफान तूफ़ान हिमालय के सर्वोच्च शिखर पर , उफान तूफ़ान अमृतधारा का , हिलोरें साधक तक ...लहरें साधक तक ,हिलोरें साधक तक , लहरें साधक तक अमृतधारा की , मेघ माला हिमालय की , अमृतधारा हिमालय की " ..... उसी समय मेघों का का उफान तूफ़ान हिमालय पर बन चूका था , मौसम वर्षा आने की सूचना दे रहा था , देखते ही देखते अमृतधारा अर्थात गंगा माँ की लहरें साधकों तक आ पहुंची , पैरों के स्तर की जलधारा घुटने के स्तर तक की अमृतधारा में परिवर्तित हो गयी और साधकों के पास सीढ़ियों तक आ पहुंची .. फिर ध्यान के मध्य में परम पूजनीय गुरुदेव का निर्देश हुआ " अमृतवर्षा अनंत अन्तरिक्ष से , साधक पर अमृतवर्षा अनंत अन्तरिक्ष से , घनघोर अमृतवर्षा , घटाटोप अमृतवर्षा साधक पर ,अमृतवर्षा ,अमृतवर्षा ,साधक पर अमृतवर्षा अनंत अन्तरिक्ष से, अमृतवर्षा , शीतल सुरभित सरस अमृतवर्षा साधक पर अनंत अन्तरिक्ष से , हिमालय की अमृतवर्षा साधक पर "... दिव्य सन्देश का पालन कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त कर रही प्रकृति भी हमारे संग ध्यान मग्न हो गयी काले मेघ गरज कर आसमान में इकट्ठे हो गए और रिमझिम अमृतवर्षा बूंदों के रूप में हम साधकों पर होने लगी ... ध्यान के अंतिम चरण में परम पूजनीय गुरुदेव द्वारा निर्देश दिया गया " त्रिपदा की स्नेह वर्षा , सविता की शक्ति वर्षा, सविता की शक्ति वर्षा ,त्रिपदा की स्नेह वर्षा , अमृतवर्षा , स्नेह वर्षा , शक्ति वर्षा , अमृतवर्षा , अमृतवर्षा ,स्नेह वर्षा , शक्ति वर्षा , अमृतवर्षा , स्नेह शक्ति समन्वय अमृत , अमृत स्नेह ..... , रस विभोर , ...सराबोर .. अंतरात्मा साधक की " अमृत वर्षा स्नेह वर्षा शक्ति वर्षा ..अमृत समर्पण एकत्व अद्वैत , एकत्व अद्वैत समर्पण , विलय विसर्जन ....विलय विसर्जन समर्पण एकत्व अद्वैत एकत्व अद्वैत , रसविभोर ... सराबोर , पे पान सोम पान अमृतपान रसविभोर ...सराबोर अंतरात्मा साधक की , पे पान सोम पान अमृत पान , रसविभोर , ...सराबोर ... " और हम सभी साधकों ने परम पूजनीय गुरुदेव द्वारा प्रेषित स्नेह और शक्ति को ग्रहण किया , ऐसी अनुभूति हुई की गंगा माँ ने परम पूजनीय गुरुदेव के संदेशों का पालन कर हमें ध्यान का जीवंत अनुभव कराया , सम्पूर्ण प्रकृति ने निर्देशों के प्रति आत्मसमर्पण कर दिया हो जैसे .... यह सब देखकर सभी स्तब्ध थे ...यह हमारे जीवन का अविस्मरनीय पल है जब हमने गुरुसत्ता को साक्षात अनुभव किया और प्रकृति ने उनके निर्देश पर अपनी आज्ञाकारिता से हमें कृत कृत कर दिया .. परम पूजनीय गुरुदेव को कोटि कोटि शत शत नमन ...... Shelly Didi The ocassion was a two day interaction of the web-swadhyayis at Shantikunj and a dhyan-session on the 12th May on the bank of river Ganga. Ten to twelve of us left from DSVV at 4.30am.and reached the Ganga behind Brahmavarchas around 5.20am.It was expected that we do 5nch kosh dhyan.But the system was set at 'Amrit Varsha' dhyan. Initially some of sat down very close to the waves of Ganga. Then was decided that we come up over the stairs. The moment the guided meditation by Yugrishi began there was a sudden realisation by all of us that its going to be something unique today. As HE said ...Himalaya ki 'meghamala'.. the water of Ganga began flowing ober the banks.We were expecting sunrise within another 10 minutes...when HE said....'ghanghor ghatatop...'there was lightening and the clouds thundered!!! After sometime when HE began saying ...'Amrit -varsha',..'Amrit-varsha'... ,,it began drizzling.We all were spellbound..amazed..speechless..to experience with all our senses..The Nature following every instruction of Yugrishi..Brahma.. This experience of ours will go down in the history of our lifetime, where it confirms that,Shriram Sharma Acharya is not just an Avatar,but he is the Mahakaal himself..also because before the Meditation along with the gushing water came a lovely Bhujang who waited till he was photographed and then immediately ducked away. Also all those who go to Shantikunj,do take a chance near the banks of Ganga for any kind of the meditation.The 'Yug pravakta shivir' had also organised a 5nch kosh dhyan, with sunrise .... Sadhna Pare Didi
   
Share Thoughts / feedbacks
      
 Your Name / Email*                
 Feedback                 
                
   
PICs















Om Bhurbhuvaha Swaha tatsaviturvarenyam bhargo devasya dhimahi dhiyo yo nah prachodayat Om Bhurbhuvaha Swaha tatsaviturvarenyam bhargo devasya dhimahi dhiyo yo nah prachodayat