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January 08 2014 9:05pm IST


   श्रीगुरु श्रीराम शर्मा आचार्य चालीसा ( स्वांत सुखाय ) ( By Sri Prakash ) ; January 08 2014 9:05pm IST

 

वेद मूर्ति तपोनिष्ठ , प्रखर प्रज्ञावान |
अवतारी चेतना गुरु , अतुलित महा प्राण || दोहा १

परमारथ हित अवतरित , स्थूल जगत पड़ाव |
जस पथ दे व्यापक हुई , तस गति जीवन भाव || दोहा २

जय जय हे गुरु श्रीरामा | जय मातु भगवती सुखधामा || १
जिनके सुमिरन से यश पावे | बुद्धि विवेक देवत्व बढावे || २
दुविधा संकट सब कट जावे | जो विचार सतगुरु अपनावे || ३
तुम्हरी कृपा विपदाहारी | सिद्ध गायत्री ब्रह्म ऋषि भारी || ४
तुम सम कोउ दयालु न देखा | अद्भूत वाक् - शक्ति वा लेखा || ५
हे विश्व के भाग्य विधाता | कलह द्वेष असुरता त्राता || ६
देव संस्कृति के उन्नायक | युग युगांतर के मह नायक || ७
कबीर रामकृष्ण बन आये | युग अनुरूप लीला दिखलाये || ८
समय समय पर धरा शरीरा | रामदास गुरु - शिवाजी वीरा || ९
माता दानकुंवरी सत् सुमती | सहधर्मिणी श्री मातु भगवती || १०
पिता रूपकिशोर बड भागी | जनम जनम का पुन फल जागी || ११
साधक सिद्ध तपस्वी संता | लेखक प्रवचक रूप अनंता || १२
युग महान संगठन कारी | महाकाल के चेतन धारी || १३
जापर कृपा गुरु की होई | जगे चेतना यदि है सोई || १४
शिष्य निरंतर सत् चेतन गामी | सरल राह सत् चित अनुगामी || १५
नित नित उपजे शुभ विचारा | भागे अंध असमंजस सारा || १६
स्नेह सना संरक्षण भासे | साधक सुपथ सुचिन्तन रासे || १७
जो भी गुरु के शरण में आया | खाली हाथ नहीं लौटाया || १८
चमत्कार अगणित परकारा | रोग मुक्ति संतान सहारा || १९
पथ साधना गहै अति वेगा | यात्रा सुगम अलौकिक नेगा || २०
नहीं भ्रम नाहीं भटकावा | नित नवीन अनुभव सुख लावा || २१
अन्धकार पर घात कुठारा | ज्ञान प्रकाश उपजे हिय सारा || २२
भागीरथ युग के कहलाये | जो आये संवेदना पाए || २३
तप से सूक्ष्म जगत हिलाया | अगणित ब्रह्म बीज उपजाया || २४
वेद सार की सुधा पिलाई | गुरु साहित्य अति फलदायी || २५
काल प्रवाह का मोडे रूख | महाकाल प्रतिनिधि बन सम्मुख || २६
गुरु विचार धारे जो कोई | तजे कुपंथ पथिक सत् होई || २७
रोग शोक भय निकट न आवें | आध्यात्मिक धन सुख पावें || २८
दिव्य दृष्टि खुल जाती उसकी | विवेक पूर्ण पथ जीवन की || २९
राह नहीं पलायनवादी | सद गृहस्थी जीवन सादी || ३०
दूजों का भी साधक ध्याना | पर सेवा से नहीं अघाना || ३१
होत शिष्य ह्रदय अति बे मल | प्रज्ञा प्रखर श्रद्धा अति सजल || ३२
गायत्री को सुलभ बनाया | यज्ञ प्रथा घर घर पहुंचाया || ३३
परंपरा ऋषि की जिलाए | युगानुकूल ही रूप दिलाये || ३४
याज्ञवल्क्य वशिष्ठ वा नारद | विश्वामित्र प्रथा निरापद || ३५
परशुराम कुरीति उन्मूलन | युग व्यास सद वृति संवर्धन || ३६
चरक पतंजलि अति हित करणी | बह चली पावन निर्झरणी || ३७
मातु तपस्थली अति कल्याणी | यह टकसाल है युग निर्माणी || ३८
गंगोत्री यह ज्ञान गंगा की | मिलीं धाराएं कर्म भक्ति की || ३९
साधक जिसमें करे स्नाना | धुले कषाय उपजे सुख नाना || ४०

गुरु बताये राह पर , गति लावे जो कोय |
तापर कृपा प्रसन्नता , महाकाल की होय || दोहा ३


(Written by Sri Prakash [ sriprakash.rai@gmail.com ] July-2009)

Om Bhurbhuvaha Swaha tatsaviturvarenyam bhargo devasya dhimahi dhiyo yo nh prachodayat

Comments

Sriprakash wrote...
Thanks for reciting this chalisa.

Nilesh Shahi, wrote...
Very nice job. Jai Ram Ji ki

punit jaiswal(punit.itech@gmail.com) wrote...
Very nice chalisha. This should reach to everybody.

Ravindra Prasad email: rv_prasad@hotmail.co.uk wrote...
Very orsam jog well done. Jai Gurudev Ki

digvijay rai wrote...
Excellent job.Jai sri Ram

SKMurty, Hyderabad wrote...
Very good effort. Now we all can keep Gurudev in our hearts and in actions through the manana of this Chalisa.

KAPIL RANA wrote...
Really good,

kishore ongole/ovrpk_34@yahoo.co.in wrote...
Thank you very much prakasha bhayya.

Mukesh Soni | Youth Empowerment Campaign | mukesh_csp@rediffmail.com wrote...
Blessing of Guru-satta.

bhaskaravalli , bhsaskaravalli@gmail.com wrote...
very nice job and i appreciate u for this work bhayya. gurudev ki krupa aap par hogi. hum ise sab ko batadenge. sab ko khush karenge.

diwakartiwari.iig@gmail.com wrote...
Excellent work...Keep it up...

drajaykumar.verma@gmail.com wrote...
bahut achcha bhai dekhkar bahut khusee huyee guru je kripa hamesha aap par rahe

AK Tiwari/ gunmasterg999@gmail.com wrote...
Well done Sri Prakash. I don't have words to admire u. May blessing of our Guru Satta be bestowed on u.

write2prvn@gmail.com wrote...
padh kar bahut hi achha laga gurudev ki kripa se aur bhi achhe ache creation kare

vivek wrote...
good job bhaiji

Ravi Kumar / ravissb@gmail.com wrote...
heart touching..
very happy to see this job.
thanks and regards..
your brother
Ravi

pankajgautam0305@yahoo.co.in wrote...
Shree Guru ShhreeRam Acharya G Ki Chalisa Ko Provide Karne Ke Liye Hardik Dhanyabad

Shivesh Kumar wrote...
Thanks a lot bhaiya.

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