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January 08 2014 9:05pm IST


   फिर बाकी कौन तमन्ना ? ( By Sri Prakash ) ; January 08 2014 9:05pm IST

 


फिर बाकी कौन तमन्ना ?


प्रज्ञा पुत्रों के कार्यों को सतत, याद करेंगे वंशज
इस देवकार्य में खपने वालों की, बाकी यही तमन्ना होगी
एक देवदूत आया, चला गया, पहचान सके हम
वे स्वयं श्रीराम, ये यादें मुद्दतें होंगी
सतयुग आ रहा है, खपायें निज को, अगवानी में उसके
अज्ञान- अन्धकार हटेगा और एक जलती हुई शमा होगी
शमा को प्रज्जवलित किया उननें, रक्षा करें हम उसकी
डालें कर्तव्य की घृत, महकती रोशनी होगी
डाल दें अपने जीवन नैया को सत्सागर में
हमें कुछ नहीं करना, वो सत्ता ही माझी होगी
दर्द-ए-जुदाई सही न जाय ऐ मालिक
तेरे पगाचिन्हों को चूमते चलें, इसमें तेरी झलकें होंगी
आग लगी है इस दूनियाँ में, भाई भाई से है परेशान
विचार क्रान्ति करें विस्तार, सुविचारों की वारिश होगी
जब पकड़ लिया धर्म ध्वजा को तो ऐ परवरदिगार !
यदि कमर झुकी होगी तो भी सीना तनी होगी
जब न हम होंगे , तब ये क्या साधन होंगे, क्या सुख होगे
केवल सत्कर्मों की सतत यादें होगी
इससे वंचित रहने वालों की सुनिए हालत
शर्मिंदगी होगी, कुहक होगी, धिक्कारें होंगी
न उनका खुदा होगा, न संताने होंगी
बस कुचलती हुई कब्रिस्तानें होंगी
जब जंग शुरू होती दो मुल्कों के बीच तो
समर भूमि में होती क्या दशा होगी ?
सिंदूरें दह्तीं होंगी, मनुजता कराहती होगी
हिरोशिमा और नागासाकी में हुए थे क्या ?
लाखों लाशें साथ साथ जलीं होंगी
जब लाखों लाख जातें हैं रोज
तो इस रास्ते में अकेलेपन की क्या भय होगी ?
जाएँ तो गुरु का कारज करतें जाएँ
गुरुधाम होगी , न बाकी कोई तमन्ना होगी
न ख्वाहिशें होंगी, न इबादतें होंगी, न गम होगा
मात्र यहाँ की एक मिसाल-ए-शहादत होगी



(Written by Sri Prakash [ sriprakash.rai@gmail.com ] for Gayatri Shaktipeeth , Harbanshpur, Azamgarh, )

Om Bhurbhuvaha Swaha tatsaviturvarenyam bhargo devasya dhimahi dhiyo yo nh prachodayat

Comments

Ravi Kumar wrote...
well said..

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