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Gayatri Pariwar- Parijans & Matrimonials
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यंत्रीकरण बुरा नहीं पर आदर्शों और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता मिले (Automation isn’t Bad but Morals and Ideals Must Prevail) (0 comments) 
July 19 2013 10:03am IST
सच्चे अर्थों में शूरवीर (A Truly Brave Person) (0 comments) 
July 19 2013 10:02am IST
प्रकृति की व्यवस्था (Nature’s Provision for Human Beings) (0 comments) 
July 19 2013 10:02am IST
शीघ्रता नहीं (Haste Makes Waste) (0 comments) 
July 19 2013 10:01am IST
बच्चों को आज्ञा देते समय परिस्थिति का ध्यान रखें (Watch the Situation While Instructing Children) (0 comments) 
July 19 2013 10:01am IST
धनवानों का पैसा सद्प्रयोजन में लगे (Capital of the Rich be used for Noble Cause) (0 comments) 
July 19 2013 10:00am IST
चरित्र की महत्ता (Importance of Character) (0 comments) 
July 19 2013 10:00am IST
बुरी आदतें (Bad Habits) (0 comments) 
July 19 2013 9:58am IST
अभ्यास से ही आदत बनती है (Habit is formed by Practice Only) (0 comments) 
July 19 2013 9:58am IST
समृद्धि के प्रति एकांगी आग्रह (Single-minded Pursuit of Material Wealth) (0 comments) 
July 19 2013 9:57am IST
क्रमिक विकास से उच्चस्तरीय स्थिति (Achieving a Higher Position Through Continuous Development) (0 comments) 
July 19 2013 9:57am IST
समृद्धि को जीवन-दर्शन मानना समाज के लिए अहितकर (Considering Affluence As A Way Of Life Is Harmful For The Society) (0 comments) 
July 19 2013 9:56am IST
ईमानदारी ही अपेक्षित (Honesty is the Best Policy) (0 comments) 
July 19 2013 9:56am IST
अनीतियुक्त उपार्जन से दृष्प्रवृत्तियों को बढ़ावा (Immoral Earning Encourages Evil Activities) (0 comments) 
July 19 2013 9:55am IST
इच्छा शक्ति का केन्द्रीकरण (Focused Willpower) (0 comments) 
July 19 2013 9:55am IST
अविचल ईमानदारी (Unflinching Honesty) (0 comments) 
July 19 2013 9:54am IST
बेईमानी सर्वथा असमर्थ (Dishonesty Is Always Doomed To Failure) (0 comments) 
July 19 2013 9:53am IST
क्रियाशीलता से शक्ति संपादन (Strength Gained By Activity) (0 comments) 
July 19 2013 9:52am IST
सफलताओं का मूलभूत आधार – लगन एवं उत्कट अभिलाषा (Perseverance and Ambition – the Master Key to Success) (0 comments) 
July 19 2013 9:51am IST
बेईमानी से लाभ – बस एक भ्रम (Profit From Dishonesty – Merely An Illusion) (0 comments) 
July 19 2013 9:51am IST
कर्त्तव्य रिश्तों से परे (Duty Takes Precedence Over Relations) (0 comments) 
July 19 2013 9:50am IST
ईमानदारी का अवलंबन ही श्रेयस्कर (Honesty is The Best Policy) (0 comments) 
July 19 2013 9:49am IST
बाटा (Bata) (0 comments) 
July 19 2013 9:48am IST
परिस्थितियों का रोना न रोयें (Avoid Wailing Over Circumstances) (0 comments) 
July 19 2013 9:47am IST
हैनरी फोर्ड (Henry Ford) (0 comments) 
July 19 2013 9:47am IST
असफलता के कारण (Reasons of Failure) (0 comments) 
July 19 2013 9:46am IST
लक्ष्य प्राप्ति के तीन आधार (Three Supports for Achieving Goal) (0 comments) 
July 19 2013 9:45am IST
सुख दुःख मनुष्य की कल्पना मात्र है !!! (0 comments) 
July 11 2013 10:49pm IST
स्त्री के इन 3 गुणों से खुशहाल हो जाती है गृहस्थी !!! (1 comments) 
July 09 2013 10:30pm IST
बांटने में जीवन का असली सुख !!! (0 comments) 
July 09 2013 10:30pm IST
दूसरों पर प्रभाव और प्रसन्नता छोड़ें !!! (0 comments) 
July 05 2013 10:21pm IST
संबंधों में शांति और प्रेम रहे !!! (0 comments) 
July 04 2013 10:15pm IST
परिवार में बच्चें को भक्ति करना अवश्य सिखाएं !!! (0 comments) 
July 03 2013 10:17pm IST
प्रेम नहीं है तो फिर सारी भावनाएं बेअसर हैं !!! (0 comments) 
July 02 2013 10:28pm IST
हनुमान की भक्ति !!! (0 comments) 
July 02 2013 10:26pm IST
क्रोध पर विजय प्राप्त कैसे करे !!! (0 comments) 
July 02 2013 10:23pm IST
भगवान शिव विश्वगुरु, शिव से बड़ा गुरु कोई नहीं !!! (0 comments) 
July 02 2013 10:15pm IST
शिव को बनाएं गुरु !!! (0 comments) 
July 02 2013 10:14pm IST
रिश्ते हमारी सम्पत्ति भी है, जिम्मेदारी भी !!! (0 comments) 
July 02 2013 10:10pm IST
सुख-दुख भाग्य का नहीं, नजरिए का खेल है !!!  (1 comments) 
June 29 2013 9:37pm IST
प्रेम - फैमिली लाइफ !!! (0 comments) 
June 28 2013 10:15pm IST
भक्ति की पराकाष्ठा सबरी, विभिषण व हनुमान में !!! (0 comments) 
June 28 2013 10:13pm IST
प्रेम को साधना होगा, जैसे कोई योग को साधता है !!! (0 comments) 
June 27 2013 10:03pm IST
देखे आज क्या बता रही है पुनिता जी लक्ष्मी जी के कथा मे !!! (0 comments) 
June 27 2013 10:01pm IST
प्रेम का रिश्ता मन से हो, देह से नहीं !!! (0 comments) 
June 26 2013 9:41pm IST
जानें, क्या है शिव की महिमा !!! (0 comments) 
June 24 2013 10:17pm IST
लक्ष्मी क्यों दबाती हैं श्री विष्णु के पैर !!! (0 comments) 
June 20 2013 10:04pm IST
Why Is Lord Vishnu Sleeping In Under The Water !!!  (0 comments) 
June 20 2013 10:02pm IST
राधा कृष्ण प्रेम और गर्म दूध !!!  (0 comments) 
June 19 2013 10:04pm IST
ગોપીઓની ઉત્કૃષ્ટ પ્રેમલક્ષણા ભક્તિ !!! (0 comments) 
June 19 2013 10:01pm IST


   स्वस्थ रहने के स्वर्णिम सूत्र Posted By moderator (October 07 2015 3:44pm IST)

 

सदा ब्रह्ममुहूर्त (पातः 4-5 बजे) में उठना चाहिए। इस समय प्रकृति मुक्तहस्त से स्वास्थ्य, प्राणवायु, प्रसन्नता, मेघा, बुद्धि की वर्षा करती है।
बिस्तर से उठते ही मूत्र त्याग के पश्चात उषा पान अर्थात बासी मुँह 2-3 गिलास शीतल जल के सेवन की आदत सिरदर्द, अम्लपित्त, कब्ज, मोटापा, रक्तचाप, नैत्र रोग, अपच सहित कई रोगों से हमारा बचाव करती है।
स्नान सदा सामान्य शीतल जल से करना चाहिए। (जहाँ निषेध न हो)
स्नान के समय सर्वप्रथम जल सिर पर डालना चाहिए, ऐसा करने से मस्तिष्क की गर्मी पैरों से निकल जाती है।
दिन में 2 बार मुँह में जल भरकर, नैत्रों को शीतल जल से धोना नेत्र दृष्टि के लिए लाभकारी है।
नहाने से पूर्व, सोने से पूर्व एवं भोजन के पश्चात् मूत्र त्याग अवश्य करना चाहिए। यह आदत आपको कमर दर्द, पथरी तथा मूत्र सम्बन्धी बीमारियों से बचाती है।
सरसों, तिल या अन्य औषधीय तेल की मालिश नित्यप्रति करने से वात विकार,, बुढ़ापा, थकावट नहीं होती है। त्वचा सुन्दर , दृष्टि स्वच्छ एवं शरीर पुष्ट होता है।
शरीर की क्षमतानुसार प्रातः भ्रमण, योग, व्यायाम करना चाहिए।
अपच, कब्ज, अजीर्ण, मोटापा जैसी बीमारियों से बचने के लिए भोजन के 30 मिनट पहले तथा 30 मिनट बाद तक जल नहीं पीना चाहिए। भोजन के साथ जल नहीं पीना चाहिए। घूँट-दो घूँट ले सकते हैं।
दिनभर में 3-4 लीटर जल थोड़ा-थोड़ा करके पीते रहना चाहिए।
भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा), मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
भोजन के उपरान्त वज्रासन में 5-10 मिनट बैठना तथा बांयी करवट 5-10 मिनट लेटना चाहिए।
भोजन के तुरन्त बाद दौड़ना, तैरना, नहाना, मैथुन करना स्वास्थ्य के बहुत हानिकारक है।
भोजन करके तत्काल सो जाने से पाचनशक्ति का नाश हो जाता है जिसमें अजीर्ण, कब्ज, आध्मान, अम्लपित्त (प्दकपहमेजपवदए ब्वदेजपचंजपवदए ळंेजतपजपेए ।बपकपजल) जैसी व्याधियाँ हो जाती है। इसलिए सायं का भोजन सोने से 2 घन्टे पूर्व हल्का एवं सुपाच्य करना चाहिए।
शरीर एवं मन को तरोताजा एवं क्रियाशील रखने के लिए औसतन 6-7 घन्टे की नींद आवश्यक है।
गर्मी के अलावा अन्य ऋतुओं में दिन में सोने एवं रात्री में अधिक देर तक जगने से शरीर में भारीपन, ज्वर, जुकाम, सिर दर्द एवं अग्निमांध होता है।
दूध के साथ दही, नीबू, नमक, तिल उड़द, जामुन, मूली, मछली, करेला आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। त्वचा रोग एवं ।ससमतहल होने की सम्भावना रहती है।
स्वास्थ्य चाहने वाले व्यक्ति को मूत्र, मल, शुक्र, अपानवायु, वमन, छींक, डकार, जंभाई, प्यास, आँसू नींद और परिश्रमजन्य श्वास के वेगों को उत्पन्न होने के साथ ही शरीर से बाहर निकाल देना चाहिए।
रात्री में सोने से पूर्व दाँतों की सफाई, नैत्रों की सफाई एवं पैरों को शीतल जल से धोकर सोना चाहिए।
रात्री में शयन से पूर्व अपने किये गये कार्यों की समीक्षा कर अगले दिन की कार्य योजना बनानी चाहिए। तत्पश्चात् गहरी एवं लम्बी सहज श्वास लेकर शरीर को एवं मन को शिथिल करना चाहिए। शान्त मन से अपने दैनिक क्रियाकलाप, तनाव, चिन्ता, विचार सब परात्म चेतना को सौंपकर निश्चिंत भाव से निद्रा की गोद में जाना चाहिए।

Om Bhurbhuvaha Swaha tatsaviturvarenyam bhargo devasya dhimahi dhiyo yo nh prachodayat

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