On May 14 2018 3:28pm IST        Pragati Rai    Wrote.... 
माँ से संपूर्ण सृष्टि का सृजन...


माँ से सम्पूर्ण सृष्टि का सृजन हुआ.... परमात्मा , माँ के रूप में प्रतिक्षण निकटस्थ है। परमात्मा जिसने जीव की उत्पत्ति हेतु प्रकृति के नियमानुसार माता की कोख में उसे संरक्षित कर दिया। माँ पीड़ा सहनकर परमात्मा के उद्देश्य को पूर्ण करने में सहयोगात्मक हो जाती है। जीव से नवजात शिशु के लिए आवश्यक रक्त, मांस,जल को अपने आहार से पोषण देने का कार्य खुद को खतरे में रखकर भी श्रेष्ठता से उसे जीवनदान करती है। जीव को गर्भावस्था से ही सुसंस्कारित बनाने, देवत्व के गुण विकसित करने में महती भूमिका निभा रही हैं। नव जीवात्मा के बौद्धिक, मानसिक, भावनात्मक, शारिरिक एवं आत्मिक प्रगति सहित सम्पूर्ण विकास में सहायक बन अनुग्रहित करती है।परिवार की बड़ी जिम्मेदारी के साथ ही जीव की शिशु अवस्था से ही अंनत नादानियाँ सद्भावके साथ मुस्कुराकर जीने का संदेश समाज को दे रही है। माँ, जीव के यौवनावस्था से उसके पालक बनने तक के सफर में ढाल की तरह रक्षा करती है। बस यहीं जीव के पथभ्रमित हो जाने की अगर शुरुआत हो जाती है तो परिवार ,समाज, और राष्ट्र के लिए चुनौती बन जाती है। यदि ये जीव एक एक घर-परिवार से कर्तव्य, मर्यादा,सदाचरण को जीवन का अविच्छिन्न अंग धारण कर, निष्ठावान बन सुपथ पर चलेंगे तो ही समाज, राष्ट्री का कल्याण होगा। कोई भी देश-प्रदेश भौतिक विज्ञान से साधन संपन्न हो अपनी प्रगति नही करा सकता, वरन आवश्यक है युवा वर्ग सहित सभी वर्गों को नारी सम्मान की भारतीय संस्कृति से जोड़कर देश की प्रगति में सहायक बनाना। माँ के अनन्त उपकार नही भूले जा सकते, कृतज्ञता व्यक्त करना अत्यंत आवश्यक किंतु ये भाव व्यक्त करना उतना ही कठिन है। माँ क्षमावान है, ह्रदय को विशाल तब भी बनाये है जब उसके असीम उपकारों को संतान भुला कर आभासी जीवन जीती है। मातृशक्ति का इन सभी दुखों, परिस्थितियों से एवं वर्तमान के भयावह वातावरण से सबक ले भावी संकटों को दूर करने की शक्ति, अपने जीवन को सेवाकार्य में लगाकर मां को ही समर्पित कर किया जाए। क्यों न जाग जाया जाए ? नारी का निरन्तर उत्थान जहाँ है, वहीं संस्कृति का निरंतर प्रसार होगा । प्रत्येक क्षेत्र खेल जगत,शिक्षा-दीक्षा, कलाकारी, पहलवानी,अंतरिक्ष अनुसंधान , विज्ञान जगत, राजनैतिक दलों के उच्च पदों में नारी का सर्वोच्च स्थान कायम है। साइना नेहवाल, मेरीकॉम, भारतीय खिलाड़ी ने तो चहुँ ओर पुरुषों की अपेक्षा अधिक ध्यान आकृष्ट कराया है, एवं नारी शक्ति ने भारत का नाम रोशन किया है। भारत में पंच कन्याओं का मर्यादित जीवन एवं उनका सम्मान सर्वविदित है। पुनीता कुंती देवी ने पांच पुत्रों को कठिन परिस्थितियों में भी जीवन को धर्म से जुड़कर,कर्तव्यनिष्ठ होकर जीने का संदेश दिया।पत्निव्रता रानी मंदोदरी ने मर्यादित रावण जैसे प्रकांड विद्वान को मजबूर कर दिया, अहंकार से मुक्त होने श्रीराम के चरणों मे जाने का मार्ग सुझाया। द्रौपदी तो यौवन अवस्था मे ही आग से जन्मी थीं, बचपन नही था उनका। मगर नियति देखिये देवी कुंती ने उन्हें धर्म से जोड़ दिया ,पुरुषों द्वारा बरती अनीतियों पर महारानी द्रौपदी ने भगवान कृष्ण का साथ पाकर पुरुष वर्ग पर जमकर प्रहार करने का सामर्थ्य दिखाया। सुकुमारी जनकपुत्री सीता ने तो पत्नीव्रत धर्म का पालन कर सभी जीवात्माओं को जीवनसाथी के प्रति अटूट विश्वास, एवं मुश्किलों में सदैव तत्परतापूर्वक जीवनसाथी को संबल देने अपने सदाचरण से प्रेरित करती है। सावित्री बाई जैसी विभिन्न विभूतियों ने पुरुषों को चिंतन करने मजबूर कर दिया होगा। फिर क्यों समाज मे रहने वाला पुरुषवर्ग नारी का आंकलन करता है?? हम सभी जीवात्मा को समान क्यों नही समझते? नर-नारी जब तक जीव समानता की दृष्टि नही अपना लेते तब तक वर्तमान स्थिति बनी रहेगी । क्या जीवात्मा को भी वर्गीकृत किया जा सकता है? नारी को मात्र भोग-विलास की वस्तु मानने की भूल नही करें, इसके आत्मिक स्वरूप को देखें एवम अनुभव करें। नारी के अनन्त उपकारों से यह जीवन हमे प्राप्त हुआ, उस जीवात्मा के लिए कृतग्यविहीनता का यह भाव हरगिज़ शोभा नही देता। वर्तमान के शर्मनाक कृत्य से पुरुष वर्ग , इस ब्रह्मांड जगत में पापी बनकर सांस लेता मात्र रह जाएगा। हमें भारत भूमि को गौरवान्वित करना होगा आइये एक बीणा उठाइये हमारे साथ साथ, नारी के उत्थान में अभियान से जुड़कर।आइये देश के कोने कोने से मातृशक्ति को श्रद्धापूर्वक नमन कर इसके सम्मान को दिन दूना- रात चौ गुना बढ़ाएं। युगों युगों से यही कहा जाता आ रहा है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, तत्र वास्ते देवता। भारतवर्ष ऋषि-मुनियों की जन्मभूमि , तपोभूमि है। इस तपोभूमि में देवत्व स्थापित करना है तो मातृशक्ति को परमात्मरूप मानकर उसके समर्पण,ममता,प्रेम,सौहार्द की छांह में रहने हेतु मातृशक्ति को सम्मान देकर अलंकृत कर सुसज्जित करें। फिर देखिए नारी के प्रति पवित्र दृष्टि रखने एवं मातृपूजन के भाव मात्र से देवत्व आपके ह्र्दयकमल में वास कर जाएगा । विचारक- प्रगति राय

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